नई दिल्ली/वाशिंगटन (17 जून 2025) इसराइल और ईरान के बीच युद्ध के हालात ने दुनिया की चिंता को बढ़ा दिया है । इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आने से एक नई बहस छिड़ गई है डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस हालत में सीज़फायर का कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस संघर्ष का स्थायी समाधान होना चाहिए। फिर डोनाल्ड ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा इस संघर्ष का स्थाई समाधान होना चाहिए ।
👉 ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा:
“दुनिया को बहलाने के लिए सीज़फायर की बातें की जाती हैं। लेकिन हमें इस टकराव का असली अंत चाहिए, न कि एक और दिखावटी विराम।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इज़राइल और ईरान के बीच पांच दिनों से लगातार हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई हो रही है। उनका कहना है कि अगर वे अमेरिका के राष्ट्रपति होते, तो यह स्थिति कभी भी पैदा नहीं होती।
🔥 बढ़ता तनाव: इज़राइल बनाम ईरान
बीते कुछ समय में मध्य पूर्व में हालत बहुत खराब है| ईरान का कहना है कि इसराइल ड्रोन ने उनके परमाणु स्थलों को निशाना बनाया, जबकि इजराइल का कहना है कि उसने अपने नागरिकों की रक्षा के लिए जवाबी हमला किया|
इस झड़प में कई सैनिक और नागरिक घायल हुए हैं|अमेरिका समेत कई देशों ने इसे लेकर गहरी चिंता जताई है|
🛰️ अमेरिका की भूमिका पर उठे सवाल
डोनाल्ड ट्रंप का बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने ईरान पर कठोर प्रतिबंध लगाए थे और इज़राइल को खुला समर्थन दिया था। ट्रंप प्रशासन ने 2018 में ईरान न्यूक्लियर डील से खुद को अलग कर लिया था|
अब जब वह फिर से राष्ट्रपति पद हैं, उन्होंने साफ किया है कि वो सिर्फ ‘समाधान’ की बातें नहीं करेंगे, बल्कि “स्थायी और निर्णायक कार्रवाई” में विश्वास रखते हैं।
🕊️ कूटनीतिक प्रयास या सैन्य दबाव?
अमेरिका की मौजूदा सरकार और कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन दोनों देशों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। हालांकि, ट्रंप के सलाहकारों की टीम ने संकेत दिया है कि वे इस सप्ताह ईरान के प्रतिनिधियों से एक गुप्त बैठक करने की योजना बना रहे हैं ताकि बातचीत के ज़रिए समाधान खोजा जा सके।
इस बीच, ट्रंप का सख्त बयान यह भी दिखाता है कि अगर वे सत्ता में लौटे, तो अमेरिकी नीति और भी आक्रामक हो सकती है।
🌍 वैश्विक प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय यूनियन ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। दुनिया भर के शेयर बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर भी इस संघर्ष का असर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है।
📌 निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दिखा दिया कि वो कड़े शब्दों और निर्णायक नीति के लिए जाने जाते हैं। इज़राइल और ईरान का यह संघर्ष किसी क्षेत्रीय विवाद से कहीं अधिक बन चुका है। ट्रंप का यह कहना कि “हमें सीज़फायर नहीं, असली अंत चाहिए”, इस बात की ओर इशारा करता है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो दुनिया को एक बड़े युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।